अमेठी : (मानवी मीडिया) सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो मेहनत और संघर्ष को अपना साथी बनाते हैं. अमेठी जिले के रहने वाले कमल ने महज 23 साल की उम्र में वैज्ञानिक बनकर मिसाल कायम की. कमल की हालत एक समय ऐसी थी कि वह एडमिशन के लिए भटक रहे थे. आज वैज्ञानिक बनकर उन्होंने संघर्ष कर रहे तमाम युवाओं को एक नई उम्मीद और ऊर्जा दी है.
उनकी सफलता हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है. होनहार व्यक्ति कभी परेशानियों के आगे सर नहीं झुकाता. वो कभी मजबूरियों को दोष नहीं देता बल्कि अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर नामुमकिन लक्ष्य को भी हासिल करने का माद्दा रखता है. हालात कितने भी बुरे क्यों न हों वो हर बुरे वक्त को हराकर लक्ष्य की ओर बढ़ता रहता है.
वैज्ञानिक कमल ने कहां से की है पढ़ाई?
कमल मौर्य अमेठी जिले की गौरीगंज तहसील के गुडूर गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम जयप्रकाश मौर्य है, जो पेशे से शिक्षक हैं. उनकी बहन आयुर्वेद विभाग की तैयारी कर रही हैं. कमल ने कक्षा 5 तक गांव के स्कूल में पढ़ाई की.
12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने रायबरेली जिले के ऊंचाहार में पूरी की. कमल ने 12वीं के बाद इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन में बीटेक की डिग्री हासिल की. केरल में लगातार 4 साल तैयारी करने के बाद वह वैज्ञानिक की तैयारी करने के लिए राजस्थान के कोटा चले गए. वहां रहकर उन्होंने दिन-रात मेहनत की और अपना लक्ष्य हासिल किया. जुलाई 2024 में कमल को वैज्ञानिक की उपाधि मिली और भारत के उपराष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया.
प्रिंसिपल ने एडमिशन देने से कर दिया था मना
कमल के पिता ने बताया कि जब वह कमल को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में एडमिशन के लिए ले गए तो प्रिंसिपल ने मना कर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया और सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचाया. कमल ने बताया कि वह बचपन से ही वैज्ञानिक बनने का सपना देखता था. उन्होंने यह भी कहा कि गांव में लोग उसे लड़ाई के लिए जानते थे, लेकिन आज लोग उसे वैज्ञानिक के तौर पर जानते हैं. कमल और उसके परिवार के लिए यह गर्व का पल है.