उत्तर प्रदेश : (मानवी मीडिया) संचालित राज्य से मान्यता वाले सीबीएसई और आईसीएससीई बोर्ड के मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर जल्द ही कार्रवाई शुरू हो सकती है। विद्यालय प्रबंधन पर आरोप है कि विद्यालयों द्वारा सरकारी दिशा निर्देश नहीं माने जाते हैं और स्कूल अपनी मनमानी करते हैं। इसमें शिक्षा का अधिकार अधिनियम आरटीई एक अहम मुद्दा है।
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरटीई के तहत प्रवेश न देने वाले प्राइवेट स्कूलों की संख्या काफी अधिक है। इसमें सीबीएसई और आईसीसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त कई स्कूल शामिल है। कई बार विद्यालय प्रबंधन सरकार के आदेश को भी अनदेखा करते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से जारी नोटिस का भी ये स्कूल जल्दी जवाब नहीं देते हैं।
मान्यता देने में राज्य सरकार की शर्त
किसी भी निजी विद्यालय प्रंबधन को बेसिक व माध्यमिक को छोड़कर राज्य से बाहर के सीबीएसई या आईसीएससीई की मान्यता लेनी हो तो इसके लिए सरकार की ओर से एनओसी लेना जरूरी होता है। इस एनओसी को माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी किया जाता है। जिसमें ये पहली शर्त होती है कि वह राज्य सरकार के आदेश-निर्देश को जरूर मानेंगे, लेकिन आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश देने में ये विद्यालय लापरवाही कर रहे हैं। ये हाल राजधानी सहित अधिकांश जिलों का है।
राजधानी में 105 स्कूल रडार पर
राजधानी में आरटीई के तहत मैपिंग में शामिल 105 सीबीएसई और आईसीएससीई बोर्ड के स्कूल पर सरकार कार्रवाई करने की तैयारी पर है। इन विद्यालयों में आरटीई के तहत 31 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जानी है। यदि ऐसा नहीं होता है माध्यमिक शिक्षा विभाग एनओसी रद्द कर सकता है।